छोटी-छोटी चीज़ों का मानसिक स्वास्थ्य और काम पर सकारात्मक असर

“Little things that create a positive impact on work and wellbeing” – To read this article in English, please click here.

“छोट्या छोट्या गोष्टींचा मानसिक आरोग्य आणि कामावर सकारात्मक परिणाम” – हा ब्लॉग मराठी मध्ये वाचण्यासाठी, येथे क्लिक करा

हमने पिछले कुछ सालों से हमारे टीम के साथ काफी करीब से उनके सपोर्ट में काम किया है। हमारा काम एडमिन/ एचआर सपोर्ट – जैसे की स्टेशनरी की सुविधा, आईटी सपोर्ट, कार्यालय की ऐसी स्थिति रखना जिससे टीम को काम करने में आसनी हो, इत्यादि – से जुड़ा है।

हमारे इस लेख से ये बताने की कोशिश कर रहे है कि अपनी शाला के साथ हमारे अनुभव में, कार्यालय (ऑफिस) में ऐसी कौन सी छोटी-बड़ी चीज़ें है जो करने या होने के वजह से काम करने वाली टीम को उनके वैलबिंग और काम करने में सहायता मिलती है।

इसको अधिक गहराई से समझने के लिए हमने अपनी शाला के हमारे सहकर्मचारियों (कलीग्स) से बातचीत की और छोटी-छोटी चीजों का क्या फायदा होता है, वह समझने की कोशिश की। इसे पढ़ते वक्त ये भी जानना ज़रूरी होगा की अपनी शाला में हमारी टीम में ज्यादातर लोग स्टूडेंट्स के साथ स्कूल के सन्दर्भ में सामाजिक भावनात्मक शिक्षा के फैसिलिटेटर या क्लासरूम टीचर, हेल्पर आदि हैं। बाकी टीम अलग-अलग भूमिकाओं में सपोर्ट के काम जैसे एडमिन, फंडरेजिंग, कम्युनिकेशन,एच आर आदि करते हैं।

बातचीत में हमने ये पहचानने की कोशिश की की ये छोटी चीज़ें होने से लोगों पर क्या असर होता है और वे कैसे महसूस करते हैं। इन में से कुछ चीज़ें हो सकता है आप अपनी संस्था में भी इस्तेमाल कर सकें।

हमने संस्था के लोगो के साथ मिलने वाले सुविधा और सहयोग के बारे में और नीचे दिए गए प्रश्नों पर चर्चा की।

प्रशासकीय (एडमिनिस्ट्रेटिव) सहयोग के रूप में आपको कैसे मदद मिलती है या आप अपने काम को इसके कारण कैसे कर पाते हैं?

एक टीम मेंबर ने बताया की “स्टेशनरी मटेरियल टाइम पर उपलब्ध होने से और मिलने से जो SEL के सेशन वो स्कूल में लेते हैं उसकी तैयारी वो अच्छे से कर पाते हैं और ये सेशन फ्लो प्लान करने में भी हेल्प करता है।”

एक और मेंबर ने बताया की इस सपोर्ट के कारण उन्हें स्टेशनरी कहाँ से आएगा ये सोचना नहीं पड़ता और “बहुत ख़ुशी मिलती है। मुझे आज़ाद लगता है और सारे काम आसानी से हो जाते हैं।”

“एक कला शिक्षक के रूप में मुझे बहुत स्टेशनरी की जरूरत पड़ती है। जब समय पर क्लास में लगने वाला मटेरियल मिलता है तो मेरे सब काम आसान हो जाते हैं। मैं अपने काम में और भी बेहतर तरीके से विचारशील हो पाता हूं, और नए विचार दिमाग मैं क्रिएट कर पाता हूं स्टेशनरी को लेकर। और रही बात स्टूडेंट्स की, स्टेशनरी टाइम पर अवेलेबल होने से स्टूडेंट्स आसानी से एक्सेस कर पाते हैं।

कुछ और SEL फैसिलिटेटर ने बताया की “जब स्टेशनरी मटेरियल क्लास में मैं लेकर जाती हूं मैं बहुत एक्साइटेड रहती हूं। और स्टूडेंट जब उसे देखते है तो वो बहुत ही ज्यादा खुश हो जाते हैं। सेशन के पहले जो तैयार वाली फीलिंग होती है वो काफी मजबूत होती है और सेशन में होने वाली अफराताफरी कम या नहीं सी हो जाती है”, “हम अपने सेशन की तैयारी बड़े ही आराम से कर पाते हैं। और सेशन में उसका बढिया प्रयोग हो जाता है।”

एक टीम मेंबर्स ने बताया की “ऑडियो विजुअल एड्स पाठ की सुविधा को सुचारू बनाते हैं, यह रचनात्मक होने के लिए अधिक विकल्प प्रदान करता है, प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल करते आसान हल या सहायता प्रदान करती है।”

ऐसी क्या व्यवस्था प्रक्रिया और नीतियां है जो दिन प्रतिदिन आपको और आपके काम को प्रभावित करती है?

अपनी शाला का सुपरविज़न फ्रेमवर्क

एक टीम मेंबर ने बताया की संस्था में सुपरविजन का स्पेस स्पष्टता और करुणा के लिए एक स्थान देता है। एक दूसरे टीम मेंबर ने कहा, “सुपरविजन स्पेस सुरक्षित महसूस करवाता है। मैं किसी भी समय उस पर भरोसा कर सकता हूं क्योंकि मेरे काम से सम्बंधित कोई भी संदेह या सपोर्ट के बारे में वहां बात हो पाती है।”

टीम इंगेजमेंट की एक्टिविटीज

एक टीम मेंबर ने बताया जो जन्मदिन पर लोगों की शुभकामनायें आती हैं ये उन्हें अच्छा महसूस करवाती हैं क्योंकि उस दिन पर ये जान कर अच्छा लगता है की लोग हमें चाहते हैं और हमारा ख्याल करते हैं। एक दूसरे टीम मेंबर ने कहा, “स्टाफ इंगेजमेंट से जुड़े जो एक्टिविटीज़ होते हैं मुझे अलग तरह से लोगों से जुड़ने का मौका देता है। एक और मजेदार एक्टिविटी जो टीम के साथ जुड़ाव महसूस करने में मदद करती है – पॉटलक याने की टीम में सभी अलग अलग खाना लेके आते हैं जो टीम मिलकर खाती है।”

टीम के लिए बनी पॉलिसीज़ और प्रैक्टिसेज

किसी और के लिए लीव की नीति से जुड़े सपोर्ट मददगार रहे हैं। “छुट्टियों की संरचना में यह समावेश की भावना देता है। मैं चुन सकता हूं कि मेरे लिए कौन सा हॉलिडे महत्वपूर्ण है और उसी के अनुसार मैं अपने हॉलीडे और लिव की योजना बना सकता हूं। साथ ही टीम ने बताया की ओरिएंटेशन प्रक्रिया बहुत रचनात्मक और अर्थपूर्ण तरीके से होती है। और इसमें टीम निर्माण, अन्वेषण और रचनात्मक तरीके से सीखने की बहुत गुंजाइश होती है।

अपडेट एक और सपोर्ट सिस्टम है जो संस्था में जो साप्ताहिक अपडेट साझा किया जाता है ये- न केवल मेरे काम के बारे में, पर पूरी संस्था में क्या हो रहा है इसका एक रूप से चित्र देती है और मुझे लगने वाले सारे संसाधन एक जगह पर अवेलेबल कर देती है।

एक और प्रक्रिया जो टीम में से कुछ लोगों ने उपयोगी समझा. “ऑफिस द्वार ऑर्गनाइज किए गए रिट्रीट या सेलिब्रेशन से ऑफिस के लोगो के साथ रिश्ते बनाने में और उसे बेहतर करने में मदद मिलती है, फन और मस्ती का स्पेस बनता है, अचीवमेंट्स को सेलिब्रेट कर पाते हैं”

कुछ और चीज़े

टीम में कई लोगों के लिए एक बात झलक के आई। उन्होंने कहा की “दिन भर के काम के बीच में अंकल की चाय राहत का काम करती है। :)”

ऑफिस में काम करते हुए फर्श पर या टेबल पर बैठ पाने की स्वतंत्रता भी काम को अपने हिसाब से प्रभावी ढंग से कर पाने में मदद करता है। कई टीम के साथियों के लिए संस्था में मिलकर खाना खाने की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई है. “दोपहर के भोजन के दौरान बातचीत, इंटरैक्ट करना और भोजन में विविधता का आनंद समुदाय की भावना पैदा करता है। यह दिन का वह एक घंटा है जहां आप मिलते हैं और उन लोगों के साथ बातचीत करते हैं जिनसे आप नियमित रूप से नहीं मिलते हैं। “, “लंच के समय पर हम क्लासरूम कन्वर्सेशन के बारे में भी बात करते हैं जो स्कूल में हुए हो।”

कोई और छोटी चीज है क्या इसके अलावा आपने देखी है जो आपके काम और सेहत को मदद करते हैं?

टीम मेंबर ने बताया की “जब हम सब ऑफिस को नया स्वरूप दे रहे थे तभी हम लोग साथ मिलकर एक अलग टाइप का काम कर रहे थे जो हम रेगुलर हमारे रोल में नहीं करते। सबके स्ट्रेंथ और इंटरेस्ट के हिसाब से हम लोग मिक्स्ड टीम्स में काम कर पाए । इसके कारण मिक्स्ड टीम्स में भी बॉन्डिंग हो रहा था जिसके लिए अक्सर मौका नहीं मिलता। ये काम करते समय एक जिम्मेदारी का अहसास भी था। ऐसा महसूस हुआ कि हम अपने घर में नए सदस्यों को आमंत्रित कर रहे हैं।”

हमारी टीम से बात-चीत और रिफ्लेक्शंस से ये जाहिर होता है की संस्था में होने वाली ये छोटी-छोटी चीज़ें जैसे कोई सिस्टम, नीतियां, या प्रक्रिया कैसे अपनी शाला के टीम मेम्बर्स के मेंटल वेलबीइंग पर कैसे प्रभाव करती हैं।

जब टीम से हमने बात की तब उनके शेयरिंग में काफी सारे फीलिंग्स या इमोशन्स का भी जिक्र हुआ जैसे की खुशी, आजादी, मस्ती, मस्ती और मुस्कुराहट वाली फीलिंग जब हमने टीम को आगे बातचीत करते हुए पूछा की इस फीलिंग से आपके लिए क्या मुमकिन हो पता है तब लोगो ने कहा ये सारी भावनाएं होने से चिंता की भावना या बेचैनी कम होती है। लोगो ने ये भी कहा कि काम को लेकर जो समझ या क्लैरिटी बनी है, वो चुनौतीपूर्ण स्थिति में जो डिस्ट्रेस आटा है तो पता होता है कि किसे और कैसे सपोर्ट करना है जैसे वो चैलेंजिंग सिचुएशन और यूज क्रिएट होने वाला डिस्ट्रेस डोनो हाय रिजॉल्यूशन हो जाता है। हम आशा करते हैं कि हमारी टीम के अनुभव से जो उभर आया वो शायद आप में से कई लोगों के संस्थान में काम आ सके, साथ ही अगर आप कुछ ऐसी छोटी चीजें नोटिस करते हैं जो आप की टीम की भलाई पर असर करती है तो जरूर शेयर करें।

लेखक:


प्रसाद तेली अपनी शाला में ह्यूमन रिसोर्सेस अससोसिएट के तौर पर पिछले 2 साल से काम कर रहे हैं। अपनी शाला से जुड़ने के पहले उन्होंने सलाम बॉम्बे में इंटरशिप किया और ह्यूमन रिसोर्सेस में मास्टर की पढाई की है। प्रसाद अपने खाली समय में कुकिंग करना पसंद करते हैं।


सिद्धेश भोसले अपनी शाल के साथ २०१६ से जुड़े हैं। वो एडमिन सपोर्ट और खोज के सोशल वर्क टीम में काम करते हैं।उन्होंने बैचलर इन सोशल वर्क की पढाई पूरी की है। सिद्धेश अपने खाली समय में क्रिकेट खेलना और ट्रेकिंग करना पसंद करते हैं।


हम हमारे आर्टिकल के सहभागियों के लिए आभारी है : शाहबान, अभिजीत, प्रनाली, समीक्षा, स्नेहा, मिताली, पूजा, श्वेता, सफीर, निरंजन, मयूरी, प्रियंका, पंकज, जेसिका, समिधा, और बाकी टीम मेंबर्स का भी धन्यवाद!

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